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विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में खटपट, माले विधायक ने कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी पर साधा निशाना

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पटना

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी समर जारी है। ऐसे में दोनों गठबंधनों को दरार और फूट की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। महागठबंधन में दरार को लेकर एक खबर जोर पकड़ रही है। दरअसल,  सासाराम क्षेत्र के रोहतास जिले में कांग्रेस कमेटी द्वारा विभिन्न विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों से आवेदन लिए जाने को लेकर महागठबंधन के घटक दलों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। जिले की काराकाट विधानसभा सीट से भाकपा माले के विधायक अरुण सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की सदस्य एवं महाराष्ट्र की सांसद प्रीणीति शिंदे इन दिनों रोहतास समेत बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर कांग्रेस उम्मीदवारों से आवेदन ले रही हैं।

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कांग्रेस का व्यवहार गठबंधन धर्म के खिलाफ
विधायक अरुण सिंह ने कहा कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी को महागठबंधन के अन्य घटक दलों वाली सीटों पर उम्मीदवारों के आवेदन नहीं लेने चाहिए। यह पूरी तरह से गठबंधन धर्म के खिलाफ है। कांग्रेस सिर्फ उन्हीं सीटों पर आवेदन लेने की हकदार है, जो उसके खाते में पहले से हैं। जिन विधानसभा सीटों पर पहले से ही राष्ट्रीय जनता दल या भाकपा माले के विधायक हैं, उन पर कांग्रेस अगर उम्मीदवारों से आवेदन ले रही है या चयन प्रक्रिया शुरू कर रही है तो यह बिल्कुल गलत है। कांग्रेस को ऐसा नहीं करना चाहिए।

भाकपा माले को कम से कम 40 सीटें चाहिए
अरुण सिंह ने कहा कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भाकपा माले को गठबंधन में कम से कम 40 सीटें मिलनी चाहिए। पिछले विधानसभा चुनाव में 19 सीटों में से 12 पर जीत और लोकसभा चुनाव में 3 सीटों में से 2 सीटों पर जीत दर्ज की गई थी। इस आधार पर माले का स्ट्राइक रेट सबसे बेहतर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि माले किसी भी हाल में अपनी जीती हुई सीट नहीं छोड़ेगी और हर जिले में माले को कम से कम एक-एक विधानसभा सीट मिलनी ही चाहिए।

गठबंधन को होगा फायदा
माले विधायक ने कहा कि बिहार में गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का वोट हमेशा माले के साथ रहा है। माले की जितनी अधिक हिस्सेदारी होगी, गठबंधन को उतना अधिक फायदा होगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी को राजद और माले विधायक वाली सीटों पर उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया रोकनी चाहिए। कांग्रेस को पिछली बार जिले में करगहर और चेनारी सुरक्षित सीट मिली थी, इसलिए उन्हें केवल इन्हीं सीटों के लिए उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

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