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डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट्स की डिमांड 2032 तक 13% बढ़ने की उम्मीद

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पत्रकार‍िता में जिस तरह एआई ने दख‍ल दिया है, हर तरफ से नकारात्मक खबरें ही सुनने को मिलती हैं. इस बीच जर्नलिज्म के छात्रों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर आई है. ग्लोबल रिपोर्ट्स और एम्प्लॉयमेंट प्रोजेक्शन के आंकड़ों ने साफ किया है कि साल 2032 तक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट्स की मांग में 13% की जबरदस्त तेजी आने वाली है. बता दें कि ये विकास दर अन्य सभी व्यवसायों की औसत वृद्धि दर से कहीं अधिक है.

बढ़ी'AI लिटरेट' पत्रकारों की तलाश
मार्केट एनालिसिस से ये भी साफ हुआ है कि अब मीड‍िया कंपनियों को सिर्फ पारंपरिक रिपोर्टर नहीं, बल्कि ऐसे पत्रकार चाहिए जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा के साथ काम करने में सक्षम हों. डेटा जर्नलिज्म और सोशल मीडिया स्पेशलिस्ट की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके पीछे मुख्य कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियंस का बढ़ता जुड़ाव और रियल-टाइम एंगेजमेंट की जरूरत है.

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इन क्षेत्रों में मिल रहे हैं सबसे ज्यादा मौके:
डिजिटल कंटेंट स्पेशलिस्ट: कंपनियां ब्रांड लॉयल्टी और सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन के लिए स्टोरीटेलिंग के माहिर लोगों को ढूंढ रही हैं.
मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट: पॉडकास्ट, वीडियो और मोबाइल-फर्स्ट न्यूज के दौर में उन पत्रकारों की मांग बढ़ी है जो मल्टीपल चैनल्स पर कहानी कह सकें.
मीडिया एनालिस्ट: बिग डेटा और AI टूल्स के जरिए ऑडियंस के व्यवहार को समझने वाले प्रोफेशनल्स अब संपादकीय फैसलों में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
टेक्निकल राइटर्स: हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे जटिल क्षेत्रों में सरल भाषा में जानकारी देने वाले पत्रकारों की भारी जरूरत है。

सैलरी में भी उछाल का रुझान
हायरिंग ट्रेंड्स बताते हैं कि खोजी पत्रकारिता (इनवेस्ट‍िगेट‍िव रिपोर्ट‍िंग) और ब्रांडेड कंटेंट जैसे खास क्षेत्रों में सालाना सैलरी में 8% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह साफ संकेत है कि जो जर्नलिस्ट अपनी स्किल्स को अपग्रेड करेंगे, उनके लिए करियर और कमाई, दोनों के रास्ते खुले हैं.

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