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ढाई साल पहले चुनावी मोड में आई विष्णु सरकार, प्रशासनिक फेरबदल से बनाई भरोसेमंद टीम

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रायपुर
 छतीसगढ़ में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की हुआ है। तबादलों की इस आंधी में कई अहम बदलाव हुए हैं जो प्रदेश सरकार के लिहाज से काफी अहम है। इस फेरबदल को रिजल्ट ओरिएंटिड तरीके से देखा जा रहा है। काफी लंबे से समय से इंतजार किए जा रहे आईएएस अफसरों के तबादले आज हो गए हैं। इन अधिकारियों में एसीएस स्तर से लेकर कलेक्टर तक शामिल रहे। इस बड़े फेरबदल को इसिलए महत्वपूर्ण कहा जा रहा है क्योंकि इसे सीएम विष्णुदेव साय ने की नई प्रशासनिक टीम कहा जा रहा है जो आगामी चुनाव तक काम करेगी।

दरअसल छतीसगढ़ सरकार को ढाई साल पूरे हो गए हैं।अब बचे समय में नतीजे लाने की जिम्मेवारी है । लिहाजा नतीजे देने वाले अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। सात कलेक्टरों को हटाकर नए चेहरों को तैनाती दी गई है। जानकारी आ रही है कि बलरामपुर कलेक्टर को मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद हटाया गया है।

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वहीं एसीएस ऋचा शर्मा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऋचा को नतीजे देने वाली अफसर के रूप में पहचाना जाता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ऊर्जा विभाग के प्रशासनिक प्रमुख तो बनाए गए हैं, साथ ही उन्हें बिजली कंपनी का अध्यक्ष भी बनाया गया है।

वहीं बात अगर गृह एवं जेल विभाग की करें तो पहली बार महिला अधिकारी की तैनाती हुई है। निहारिका बारीक को इस अहम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह वित्त विभाग अब डॉ. रोहित यादव संभालेंगे। मुकेश बंसल को पीडब्ल्यूडी और छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। मुकेश बंसल से सरकार उम्मीद कर रही है कि चुनाव मोर्चे पर जाने से पहले तक स्थिति बेहतर हो जाए। वहीं इन तबादलों में सबसे ज्यादा चर्चा बसवराजू एस के मुख्यमंत्री सचिवालय से बाहर होने को लेकर रही। उन्हें अब कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग का प्रभार सौंपा गया है।

7 जिलों के कलेक्टरों को भी बदला गया है। सरकार ने संदेश  साफ और स्पष्ट है कि लोक हित योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लिहाजा सरकार ने बेहतर नतीजों की दिशा में बड़ा फेरबदल करके पहला कदम बढ़ा दिया है। देखना होगा सरकार कितनी सफल हो पाती है और ये अधिकारी लक्ष्यों के कितने करीब पहुंच पाते हैं।

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