छत्तीसगढ़

अगर पुराने पाप धोये जा सकते हैं तो भोगने की आवश्यकता क्यों : प्रवीण ऋषि

रायपुर

कर्म को लेकर हम हमेशा से सुनते आ रहे है कि अच्छा करोगे तो अच्छा पाओगे। इसमें 'अच्छा' शब्द का कोई चेहरा नहीं है। इसको चेहरा देने का काम कर्म करता है। कर्म का एक प्रदेश बंद (पार्टिकल) आपने अलग कर दिया तो उसके चरित्र को बदला जा सकता है। पार्टिकल को बदल कर चरित्र को बदला जा सकता है। इसे कहते हैं स्थित बंद। वेदना का समय कम कर कर के व्यक्ति को धार्मिक बनाया जा सकता है, वहीं इसका समय बढ़ा कर के शैतान। यह समय का खेल है। कर्म का तत्व कैसे अलग किया जा सकता है, इसकी प्रक्रिया आगम में बताई गई है। कर्म का एक प्रदेश बंद अगर अलग कर दिया तो रिश्ते और भाग्य बदल जाते हैं।  उपाध्याय प्रवर ने ये बातें लालगंगा पटवा भवन में अर्हम सीक्रेट्स आॅफ कर्मा के ट्रेनर्स और धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी।

ललित पटवा ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार को अर्हम सीक्रेट्स आफ कर्मा ट्रेनिंग शिविर में भाग लेने वाले ट्रेनर्स को सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। रविवार को इस शिविर का अपडेट सेशन भी होगा। वहीं अर्हम ब्लिसफुल कपल शिविर का भी आयोजन 3 सितंबर को होने वाला है। यह शिविर सुबह 8 बजे से शुरू होगा। अर्हम सीक्रेट्स आफ कर्मा के इस सेशन में लगभग 78 टीचर्स ने ट्रेनिंग ली, जिनमे 12 जैन समुदाय से बाहर के हैं, वहीं एक टीचर मुस्लिम समुदाय का है। प्रवीण ऋषि कहते हैं कि इस कला में धर्म, जाति का कोई बंधन नहीं है। कोई भी इस शिविर में भाग ले सकता है।  इनमे से कई ट्रेनर्स ने अपने अनुभव धर्मसभा में साझा किए। कैसे इस शिविर से उन्हें अपने जीवन में बदलाव महसूस किया, इस साधना ने उनके जीवन में क्या परिवर्तन लाये, कैसे उन्होंने अपने अलावा दूसरों को भी इस साधना के जरिये मार्ग दिखाया।

प्रवीण ऋषि ने कहा कि कर्म को लेकर एक प्रचलित धारणा है कि कर्म भोगे बिना मोक्ष नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर पुराने पाप धोये जा सकते हैं तो भोगने की आवश्यकता क्यों? मिथ्या दृष्टि वाले को कर्म भोगना ही पड़ता है। भगवान महावीर कहते हैं कि कर्म के आगे झुकना नहीं, कर्म तुम्हारा गुलाम है, तुम उसके नहीं। आपको यह सोचना है कि कर्म मुझे नचाने वाला नहीं है, बल्कि मैं कर्म को नचाने वाला हूँ। धर्म, कर्म को भोगने के लिए नहीं है, बल्कि धर्म तो कर्मों का क्षय करने के लिए है। कर्म को चुनौती दीजिए, विजयी बनने की मानसिकता के साथ। जिसके कारण तुम बंधन से मुक्त हो जाते हो, वो धर्म है। जो तुम्हारी समस्या का समाधान करे वो धर्म है, और जो समस्या दे वो संसार है। अहम विज्या ये सब सिखाता है।

उन्होंने ट्रेनर्स को संबोधित करते हुए कहा कि इस साधना का आप कैसा उपयोग कर सकते हो यह आप पर निर्भर है, आप चाहो तो किसी अपराधी को एक सज्जन में बदल सकते हो। उसके प्रवेश बंद में से एक पार्टिकल निकाल कर उसे सुधार सकते हो, धर्म के मार्ग पर ला सकते हो। उन्होंने सभी ट्रेनर्स को यह लक्ष्य दिया कि आप सब यह प्रयोग करें। इस दौरना उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने ट्रेनर्स को अपने अनुभव साझा करने का अवसर दिया। महाराष्ट्र के ट्रेनर्स ने अपने अनुभव साझा किए। सभी नौकरीपेश लोग थे। इनमे से कई जैन समुदाय के बाहर के थे, लेकिन उन्होंने बताया कि इस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कोई अहसास नहीं हुआ कि वे किसी दूसरे समुदाय से है।

रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि प्रवीण ऋषि ने कर्म को चुनौती देने के लिए खुद को तैयार करने अर्हम सीक्रेट्स आॅफ कर्मा शिविर शुरू किया है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2010 में की थी, और 2012 में उन्होंने पहला शिविर बेंगलुरु में आयोजित किया था। यह शिविर 51 दिन चला था। इसके बाद प्रवीण ऋषि ने 2018 से रेसिडेंशियल शिविर की शुरूआत की तो 72 घंटों का होता है। 2020 से ट्रेनर्स प्रोग्राम की शुरूआत हुई और 2025 तक 5000 कर्मा ट्रेनर्स तैयार करने की योजना है।

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