राजनीति

क्या बीजेपी के पाले में आएंगे मुसलमान! पसमांदा के बाद सूफियों पर है नजर

लखनऊ

केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरी बार आने को आतुर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विभिन्न वर्ग के मुसलमानों को लुभाने के लिए खूब माथापच्ची कर रही है। पार्टी ने मुसलमानों तक अपनी पहुंच बढ़ानी की एक रणनीतिक पहल के तहत 'सूफी संवाद महा अभियान' शुरू किया है। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा की तरफ से आयोजित यह आउटरीच प्रोग्राम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और सरकार की कल्याणकारी नीतियों से विभिन्न दरगाहों के सूफी आध्यात्मिक नेताओं और उनके अनुयायियों को रू-ब-रू करवाने की एक पहल है। पार्टी की यह पहल पसमांदा मुसलमानों के बाद अब मुस्लिम समुदाय के एक अलग वर्ग – सूफी अनुयायियों को खुद से जोड़ने के प्रयासों का एक हिस्सा है।लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में 100 से अधिक दरगाहों के लगभग 200 सूफी नेताओं ने भाग लिया। बीजेपी को उम्मीद है कि ये सूफी नेता देशभर के मुसलमानों तक सरकार की नीतियों और योजनाओं को पहुंचाने वाले दूत की भूमिका निभाएंगे।

सूफियों से मेल-मिलाप के लिए 22 राज्यों में समीतियां

बीजेपी ने सूफी समुदाय के साथ जुड़ने की दिशा में यह कदम उठाकर यह बताने की कोशिश की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी पार्टी भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग के रूप में सूफी परंपराओं का सम्मान करते हैं। सूफी देश के आध्यात्मिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। सरकार का उद्देश्य सूफी नेताओं को भाजपा में शामिल होने के लिए राजी करने के बजाय उनके साथ रचनात्मक संवाद स्थापित करके आम मुसलमानों की चुनौतियों और मांगों को बेहतर ढंग से समझना है। अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने कहा कि आउटरीच प्रोग्राम का उद्देश्य भाजपा और सूफी समुदाय के बीच की खाई को पाटना है। भाजपा ने आम मुसलमानों के साथ रिश्ते मजबूत करने के मकसद से सूफी नेताओं से संपर्क स्थापित करने के लिए 22 राज्यों में समितियां बनाई हैं।

आतंकवाद और कट्टरपंथी सोच से मुकाबला

जमाल सिद्दीकी ने इस धारणा पर जोर दिया कि जहां सूफीवाद पनपता है और अपनी जड़ें जमा लेता है, वहां आतंकवाद का समर्थन कमजोर हो जाता है। प्रेम, शांति और भाईचारे के सूफी सिद्धांतों को बढ़ावा देकर भाजपा का लक्ष्य विभाजनकारी और चरमपंथी विचारधाराओं का मुकाबला करना है, जिन्होंने मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों में जड़ें जमा ली हैं।

बीजेपी ने मुसलमानों के लिए दिया नया नारा

सूफी संवाद महाअभियान की शुरुआत लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले और पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के वक्त हो रही है। उत्तर प्रदेश में भाजपा 10 हजार से ज्यादा सूफी दरगाहों के नेताओं से जुड़ने की योजना बना रही है। पार्टी का इरादा पूरे राज्य में सूफियों तक पहुंचने का है। अल्पसंख्यक मोर्चा के यूपी अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के साथ सकारात्मक संवाद बनाकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (एसपी) जैसे विपक्षी दलों की तरफ से फैलाई गई गलतफहमी को दूर करना चाहती है। इस पहल का उद्देश्य यह संदेश देना है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा समावेशिता को बढ़ावा देकर विभिन्न समुदायों की चिंताओं का समाधान करना चाहती है। एकता और साझा लक्ष्यों के विचार पर जोर देते हुए लखनऊ बैठक में एक नया नारा, 'ना दूरी है, न खाई है, मोदी हमारा भाई है' गढ़ा गया।

मुसलमानों के साथ अलग-अलग वर्ग से जुड़ने की दिशा में भाजपा की छटपटाहट उसके आउटरीच विजन में एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। पसमांदा आउटरीच पिछड़े वर्ग के मुसलमानों पर केंद्रित है, जो हिंदू समाज से इतर दूसरे समुदायों में भी सामाजिक पिछड़ेपन को स्वीकार करने की एक पहल मानी जा सकती है। वहीं, सूफी संवाद की पहल मुस्लिम समुदाय के अधिक समावेशी वर्ग के साथ जुड़ने का प्रयास है। इसके तहत मंशा विशेष रूप से सूफीवाद के चिश्ती संप्रदाय के माध्यम से मुस्लिम समाज के भीतर कट्टरपंथी तत्वों को कमजोर करने की है।

समावेशी आउटरीच स्ट्रैटिजी

भाजपा के आउटरीच प्रोग्राम से साफ है कि पार्टी समाज के विभिन्न वर्गों में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है। सूफी समुदाय के साथ जुड़कर और उनके समावेशी मूल्यों पर जोर देकर भाजपा का लक्ष्य समर्थन का व्यापक और अधिक बहुआयामी आधार तैयार करना है। यह दृष्टिकोण इस मान्यता को दर्शाता है कि सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास को असली मायने तभी दिया जा सकेगा जब देश की धार्मिक विविधता को समझते हुए विभिन्न वर्गों की जरूरतों और चिंताओं को प्रभावी ढंग से दूर किया जाए।

मुसलमानों को जोड़ने को आतुर बीजेपी

भाजपा द्वारा सूफी संवाद महाअभियान की शुरुआत भारत में मुस्लिम समुदाय के साथ जुड़ने के उसके दृष्टिकोण में एक रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है। सूफी नेताओं और अनुयायियों तक पहुंच कर पार्टी का लक्ष्य समावेशिता को बढ़ावा देना, विभाजनकारी विचारधाराओं का मुकाबला करना और मुस्लिम आबादी के व्यापक स्पेक्ट्रम तक अपनी नीतियों और दृष्टिकोण को पहुंचाना है। यह पहल, पिछले आउटरीच प्रयासों के साथ भारत के जटिल और बहुआयामी समाज की विविध आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को संबोधित करने के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।

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