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पूर्व इंग्लिश कैप्टन ने बयां किया ‘कड़वा सच’, स्टोक्स के साथ ऐसा हुआ, गिल को भी समय लगेगा

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नई दिल्ली 
शुभमन गिल की अगुवाई में भारतीय टीम इन दिनों इंग्लैंड दौरे पर है। भारत ने पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का आगाज हार के साथ किया है। इंग्लैंड ने लीड्स में भारत को पांच विकेट से मात दी। भारत पांचवें दिन 371 रनों को डिफेंड नहीं कर पाया था। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलिस्टेयर कुक ने पहली बार भारतीय टेस्ट टीम की कमान संभालने वाले गिल का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को गिल के साथ तालमेल बिठाने में थोड़ा समय लगेगा। इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डेविड लॉयड ने 25 वर्षीय गिल को रिएक्टिव कप्तान करार दिया।
 
लॉयड ने स्टिक टू क्रिकेट शो पर बोलते हुए गिल की टैक्टिकल समझ और मैदान पर उनकी स्पष्टता लो लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ''गिल के बहुत कम अनुभव वाले कप्तान हैं। वह इससे कैसे वापसी करेंगे? उनके पास रविंद्र जडेजा और करुण नायर हैं, जो 30 के दशक में हैं। उनकी टीम में अनुभव तो है। एक युवा टीम होना अच्छा है लेकिन उनकी कप्तानी में जो कुछ भी नजर आया, वो प्रोएक्टिव होने के बजाए रिएक्टिव ज्यादा हैं।" वहीं, कुक ने सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण पेश करते हुए गिल के शुरुआती दिनों की तुलना बेन स्टोक्स से की।

कुक ने ‘कड़वा सच’ बयां करते हुए कहा, "जब आप किसी टीम की कमान संभालते हैं तो हमेशा एक ऐसा दौर आता है, जब टीम को नए लीडर के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है। जब बेन स्टोक्स आए तो उनके साथ भी ऐसा हुआ। स्टोक्स आए और कहा, 'हम हर गेंद को हिट करने की कोशिश करेंगे' तो इंग्लैंड के खिलाड़ियों को उनके साथ तालमेल बिठाने में थोड़ा समय लगा था।" पूर्व भारतीय स्पिनर मुरली कार्तिक का मानना है कि मैदान पर कई खिलाड़ियों का एकसाथ निर्देश देना अच्छी बात नहीं है, जैसा कि लीड्स टेस्ट के पांचवें दिन हुआ था।

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कार्तिक ने क्रिकबज पर कहा, ''एक समय मुझे लगा कि बहुत सारे कप्तान हैं। मैं यह समझ नहीं पाया। केएल राहुल हाथ हिला रहे थे, ऋषभ पंत भी ऐसा कर रहे थे और शुभमन गिल भी, जिन्हें वास्तव में कप्तान नियुक्त किया गया है। मैं उन कई हाथों के इशारों को समझ नहीं पाया। आप चीजों को जटिल नहीं बनाना चाहेंगे। कप्तान सिर्फ एक ही है।" उन्होंने आगे कहा, "एक सीनियर प्लेयर यहां-वहां थोड़ा बदलाव करता है, किसी के गलत पोजीशन में होने पर थोड़ा ठीक करता है, थर्ड मैन या शॉर्ट फाइन, मिड-ऑन, मिड-ऑफ भेजना; ये सब करना कभी-कभी ठीक है। हालांकि, इतने सारे खिलाड़ियों का तेजी से फैसले लेना अच्छा संकेत नहीं है।"

 

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