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मध्य प्रदेश में नौ साल बाद नए पदोन्नति नियम लागू किए गए, पांच तहसीलदारों को बनाया प्रभारी डिप्टी कलेक्टर

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भोपाल
मध्य प्रदेश में नौ साल बाद नए पदोन्नति नियम लागू किए गए हैं। 31 जुलाई तक सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नतियां दी जानी हैं। इस बीच सामान्य प्रशासन विभाग ने पांच तहसीलदारों को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर बना दिया। जबकि, पदोन्नति की प्रक्रिया विभागों ने प्रारंभ कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने अलका एक्का तहसीलदार बैतूल को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पांढुर्णा, आलोक वर्मा तहसीलदार आगर मालवा को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर शाजापुर, अनिल कुमार तलैया तहसीलदार छतरपुर को डिप्टी कलेक्टर पन्ना, बालकृष्ण मिश्रा तहसीलदार कटनी को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर सतना और अनिल राघव तहसीलदार ग्वालियर को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर ग्वालियर बनाया है। उच्च पद के प्रभार के लिए कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ नहीं दिया जाएगा। इन्हें राज्य प्रशासनिक सेवा के वेतनमान या क्रमोन्नति की पात्रता भी नहीं होगी।  
जबकि पदोन्नति की प्रक्रिया को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने उच्च पद का प्रभार देने पर रोक लगा दी है, क्योंकि जब पदोन्नति होगी तो इनमें कई अधिकारी ऐसे भी होंगे जो पदोन्नत ना हो पाएं। तब विवाद की स्थिति ना बने, इसलिए यह कदम उठाया है लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने अब तक इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किए हैं।
 
आरक्षण को लेकर अधिकारियों के पक्ष से असहमत सपाक्स
उधर मुख्य सचिव द्वारा पदोन्नति नियम के क्रियान्वयन को लेकर बुलाई गई बैठक में अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया, रश्मि अरुण शमी और प्रमुख सचिव गुलशन बामरा के सवाल उठाने पर सामान्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण संस्था के संस्थापक हीरालाल त्रिवेदी ने सवाल उठाए।

शासन का अंग होने के नाते जिस विषय पर कैबिनेट में निर्णय हो चुका हो, उस पर इस तरह की बात नहीं होना चाहिए। सामान्य वर्ग के अन्य कर्मचारियों का भी कहना है कि हम प्रारंभ से ही यह बात कहते आए हैं कि आरक्षण से हमारा विरोध नहीं है लेकिन सामान्य वर्ग के पदों पर अनारक्षित वर्ग के लोगों को नहीं आना चाहिए, जबकि, नियम में वही प्रविधान किए गए हैं।

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