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पशुओं की ब्लडलाइन चेंज करने की कवायद में जुटा पटना जू

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पशुओं की ब्लडलाइन चेंज करने की कवायद में जुटा पटना जू 

93 प्रजाति के 1100 जानवर हैं पटना जू में 
पेयरिंग और ब्लडलाइन चेंज से सुधरेगी व्यवस्था 

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पटना
संजय गांधी जैविक उद्यान में अब ब्लडलाइन चेंज करने की कवायद शुरू की गई है। नए पशुओं को लाने की जगह जो जानवर पहले से यहां मौजूद हैं उनकी पेयरिंग और ब्लडलाइन चेंज करने की कोशिश की जा रही है। ब्लडलाइन चेंज करने के पीछे का उद्देश्य इनब्रिडिंग को रोकना और आने वाले बीमारियों से बचाना है। इन पशुओं की बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण कवायद है। 

यह पहल पशुओं की सेहत, प्रजनन क्षमता और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि समय – समय पर ब्लडलाइन बदलना बहुत जरूरी है क्योंकि एक ही नस्ल या रक्तरेखा के पशुओं में लगातार प्रजनन से उनकी सेहत कमजोर होती है, बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है और प्रजनन क्षमता घट जाती है। जू प्रशासन ने बताया कि एक ही नस्ल के बीच लगातार मेटिंग करने से इनब्रिडिंग की समस्या आ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए रक्तरेखा बदलने के लिए देश के विभिन्न चिड़ियाघरों से जानवरों के आदान प्रदान की बात की जा रही है। 

ब्लडलाइन चेंज करने के लाभ 
ब्लडलाइन चेंज करने से वन्यजीवों में बीमारियों का खतरा कम होता है, उनका स्वास्थ्य भी ठीक होता है। साथ ही उनकी प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है और पशुओं में विविधता आती है। जीवों के संरक्षण के लिए यह प्रक्रिया बहुत जरूरी मानी जाती है। जू के निदेशक हेमंत पाटील ने बताया कि इसके लिए विभिन्न चिड़ियाघरों से बात हो रही है, वर्तमान में इस प्रक्रिया के लिए कोलकाता जू से जिराफ मंगाने के बात चल रही है। गैंडों के प्रजनन के बारे में बताते हुए भी उन्होंने बताया कि हमारे यहां विश्व में सर्वाधिक गैंडे हैं और उनकी भी संख्या बढ़ाने के लिए कोशिश की जा रही है। अभी हाल ही में दो स्टार कछुओं का भी जन्म हुआ है।

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