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विकसित भारत के लिये लोक निर्माण से लोक कल्याण की पहल

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अधोसंरचनाओं के निर्माण में आई तेजी, बढ़ी पारदर्श‍िता

भोपाल 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत की कल्पना के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश 'लोक निर्माण से लोक कल्याण' की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आधारभूत अधोसंरचनाओं को मजबूत करने में लोक निर्माण विभाग ने अपनी भूमिका को और ज्यादा सुदृढ़ बनाया है। नई तकनीक, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना के साथ लोक निर्माण की गतिविधियों में अब तेजी आई है। लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि 'लोक निर्माण से लोक कल्याण' प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ आधारभूत सुविधाएँ पहुँचाने का ठोस संकल्प है। बीते अठारह माह में विभाग द्वारा उठाये गये अनेक नवाचारी प्रयासों से विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आई और गुणवत्ता में वृद्ध‍ि हुई। जनता के प्रति जवाबदेही भी बढ़ी है।

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"लोकपथ” ऐप : जवाबदेही का माध्यम
वर्ष 2024 में प्रारंभ हुआ “लोकपथ” मोबाइल ऐप विभाग की महत्वपूर्ण पहल है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक क्षतिग्रस्त सड़कों की तस्वीर अपलोड कर सीधे शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिसका समाधान सात दिनों में सुनिश्चित होता है। बीते एक वर्ष में 7,800 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 95 प्रतिशत का समय-सीमा के भीतर निपटारा किया गया। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। 'कौन बनेगा करोड़पति' में इस पर प्रश्न भी पूछा गया। गुजरात सहित अन्य राज्यों के अभियंताओं ने भी इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखाई है।

डिजिटल प्रबंधन और पारदर्शिता
विभाग ने एकीकृत परियोजना प्रबंधन प्रणाली (आई.पी.एम.एस.) लागू की है, जिससे बजटिंग, स्वीकृति, निविदा और प्रगति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है। 'रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम' (आर.ए.एम.एस.) के तहत 10 हजार किलोमीटर सड़कों का जी.आई.एस. आधारित सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जिसे अगले चरण में 60 हजार किलोमीटर नेटवर्क तक विस्तारित किया जाएगा। साथ ही, प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल पर 55 हजार किलोमीटर सड़कों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। इससे परियोजनाओं की प्लानिंग और एलाइनमेंट और अधिक वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से सुदृढ़ हो रहे हैं।

निरीक्षण की नई व्यवस्था
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 14 विभागीय प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है तथा मोबाइल लैब की व्यवस्था की जा रही है। सड़क निर्माण में प्रयुक्त डामर अब केवल सरकारी रिफाइनरियों से लिया जा रहा है और जी.पी.एस. आधारित ई-लॉकिंग टैंकरों से इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। औचक निरीक्षण की नई व्यवस्था के तहत हर माह की 5 और 20 तारीख को मुख्य अभियंताओं की टीम जिलों का निरीक्षण करती है। अब तक 417 परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया है, जिसमें 30 ठेकेदारों और 18 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई तथा 16 अभियंताओं को उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया गया।

पर्यावरण हितैषी कदम
पेड़ों की कटाई की बजाय ट्री शिफ्टिंग को बढ़ावा दिया गया है। सड़कों के किनारे भूजल पुनर्भरण बोर और सड़क निर्माण से निकली मिट्टी से बने “लोक कल्याण सरोवर” जैसी पहलें भी की जा रही हैं। इस वर्ष 500 सरोवर बनाने का लक्ष्य है। “हरित मध्यप्रदेश अभियान” अंतर्गत 2 लाख पौधों का रोपण कर उनकी जियो-मैपिंग की गई।

नवीन तकनीक और भविष्य की दिशा
सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन के लिए फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफ.डी.आर.), व्हाइट टॉपिंग, माइक्रो सरफेसिंग, जैट पैचर, ग्लास ग्रिड और जियोग्रिड जैसी तकनीकों को अपनाया गया है। भविष्य में यू.एच.पी.एफ.आर.सी., जी.एफ.आर.पी. और वेस्ट प्लास्टिक आधारित सड़क निर्माण तकनीकों को भी लागू करने की योजना है। विभाग रोड नेटवर्क मास्टर प्लान और रोड सेक्टर नीति पर कार्य कर रहा है, जिनमें औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी एवं पर्यटन और कृषि सड़कों को प्राथमिकता दी जा रही है।

सतत् प्रशिक्षण और शोध
अभियंताओं के लिए इंजीनियरिंग अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। सी.आर.आर.आई. नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षणों में अब तक 150 अभियंता प्रशिक्षित हो चुके हैं। अगले छह माह में 1,000 अभियंताओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।

 

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