Home मध्य प्रदेश इंदौर में सरकारी डॉक्टरों की मनमानी: निजी अस्पताल भेजने पर एक निलंबित,...

इंदौर में सरकारी डॉक्टरों की मनमानी: निजी अस्पताल भेजने पर एक निलंबित, एक की 15 दिन की सैलरी कटी

71
0
Jeevan Ayurveda

इंदौर
शासकीय अस्पतालों से लाखों रुपये वेतन लेने के बाद भी यहां के डॉक्टर अपनी जेब भरने में ही व्यस्त रहते हैं। प्रदेश का सबसे बड़ा शासकीय अस्पताल एमवायएच हमेशा से मरीजों को निजी अस्पताल में भेजने के लिए चर्चा में रहा है। एक बार फिर निजी अस्पताल में मरीज को भेजने का मामला सामने आया है। मामले में एक डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है। इसी प्रकार ड्यूटी के समय घर पर आराम कर रही महिला सीनियर डॉक्टर को निलंबित करने की कार्रवाई की गई है।

दरअसल, कुछ दिनों पहले अस्पताल में रात के समय रतलाम से न्यूरोसर्जरी विभाग में एक मरीज इलाज के लिए आया। रातभर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उसका इलाज करने के बजाय जमीन पर रखा। इसके बाद उससे कहा कि आयुष्मान कार्ड है तो इंडेक्स अस्पताल में इलाज करवाओ और उसे भेज दिया। मामले में मरीज द्वारा लिखित शिकायत के बाद जांच की गई। जांच में सामने आया कि विभाग में एमसीएच के विद्यार्थी द्वारा मरीज को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। इसके एवज में उसे निजी अस्पताल की ओर से राशि भी मिलती है। मामले में जांच के बाद डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है।
 
कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, ड्यूटी डॉक्टर नहीं मिली
एमवाय अस्पताल में जिन डॉक्टरों की ड्यूटी लगती है, वे इस दौरान निजी अस्पताल में रहते हैं या फिर घर पर आराम करते रहते हैं। हाल ही में सिमरोल सड़क हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया था, लेकिन इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में कोई ड्यूटी डॉक्टर नहीं था। हादसे के बाद डीन पहुंचे तो कोई डॉक्टर नहीं मिला। दो घंटे बाद ड्यूटी पर महिला सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर पहुंची। कारण पूछने पर कहा कि घर पर थी। इस बीच कलेक्टर भी पहुंचे। लापरवाही सामने आने के बाद डीन ने महिला डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया है।

Ad

सीनियर डॉक्टर भी गिरोह में शामिल
एमवाय अस्पताल में मरीजों को लापरवाही कर निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजने के लिए कई गिरोह बने हुए हैं। इन गिरोह में सीनियर डॉक्टर भी शामिल हैं। उन्हीं के संरक्षण में ड्यूटी डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर द्वारा यह कार्य किया जाता है। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर तो अपने ही खुद के अस्पताल में मरीजों को लापरवाही करवाकर ले जाते हैं। इसी प्रकार पेट रोग विभाग, मेडिसिन विभाग, न्यूरोसर्जरी विभाग आदि से भी मरीज बाहर जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इनके गिरोह में एंबुलेंस संचालक, स्टाफ, आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारी भी शामिल रहते हैं। यही कारण है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है।

डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने कहा कि एमवायएच से मरीज को लापरवाही कर निजी अस्पताल में भेजने के मामले में कार्रवाई की गई है। एक डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है। इसके साथ ही ड्यूटी पर मौजूद नहीं होने पर सीनियर रेजिडेंट को बर्खास्त किया गया है। मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here