Home देश भारतीय नौसेना करेगी इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि, इस साल 19...

भारतीय नौसेना करेगी इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि, इस साल 19 युद्धपोत शामिल

67
0
Jeevan Ayurveda

नई दिल्ली

भारतीय नौसेना अपने इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि की ओर अग्रसर है। इस वर्ष 2026 में नौसेना 19 युद्धपोतों को कमीशन करने जा रही है, जो एक वर्ष में सबसे बड़ी वृद्धि होगी। पिछले वर्ष 2025 में नौसेना ने 14 जहाजों को कमीशन किया था, जिसमें एक पनडुब्बी भी शामिल थी। सूत्रों के अनुसार, यह उत्पादन गति इतिहास में अभूतपूर्व है और यह स्वदेशी जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाती है।

Ad

ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 2026 नौसेना के विस्तार का शिखर वर्ष रहेगा। इस दौरान नीलगिरी श्रेणी के मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट्स की संख्या में भी इजाफा होगा। इस श्रेणी का अग्रणी पोत जनवरी 2025 में सेवा में आया था, जिसके बाद अगस्त 2025 में आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि का कमीशनिंग हुआ। चालू वर्ष में इस श्रेणी के कम से कम दो और पोत नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, सूची में इक्षाक श्रेणी का सर्वे पोत और निस्तार श्रेणी का डाइविंग सपोर्ट पोत भी शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर कमीशनिंग को संभव बनाने में ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ पद्धति की अहम भूमिका है। इस प्रक्रिया में जहाज के ढांचे, सुपर-स्ट्रक्चर और आंतरिक प्रणालियों को 250 टन के ब्लॉक्स में तैयार किया जाता है, जिन्हें बाद में जोड़ा जाता है।

इन ब्लॉक्स को इस तरह सटीकता से बनाया जाता है कि वेल्डिंग के बाद केबल और पाइपिंग सहज रूप से फिट हो सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से निर्माण के लिए ‘सीक्वेंस’ तैयार किया जाता है- जिसमें सामग्री की सोर्सिंग से लेकर उत्पादन समय-सीमा तक शामिल होती है। नए डिजाइन सॉफ्टवेयर, AI और आधुनिक निर्माण तकनीकों के चलते अब भारतीय शिपयार्ड्स छह साल में जहाज तैयार कर रहे हैं, जबकि पहले यह अवधि 8-9 साल होती थी। सॉफ्टवेयर मशीनरी के लेआउट, उपकरणों और फ्लुइड डायनेमिक्स तक का पूर्वानुमान लगाता है।

बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय ने 10-12 वर्ष पहले युद्धपोतों के लिए इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन को अपनाया था, जिसके अब ठोस नतीजे सामने आ रहे हैं।

रणनीतिक स्तर पर, भारत के लक्ष्य चीनी नौसैनिक विस्तार का सामना करना, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नैविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखना, क्वॉड और ASEAN के साझेदारों का समर्थन करना और इंडो-पैसिफिक में शक्ति-प्रक्षेपण को सुदृढ़ करना है।

हालांकि, नौसेना का यह विस्तार अभी भी चीन से कम है। बीजिंग नए जहाजों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अमेरिका के पूर्व आकलन के अनुसार, चीन की नौसेना के पास 2025 के अंत तक 395 जहाज और पनडुब्बियां हो सकती हैं- जो पिछले अनुमान 370 से लगभग 25 अधिक हैं।

मई 2025 की एक अमेरिकी रिपोर्ट- चाइना नेवल मॉडर्नाइजेशन: इम्प्लिकेशंस फॉर यूएस नेवी कैपेबिलिटीज, बैकग्राउंड एंड इश्यूज फॉर यूएस कांग्रेस- में कहा गया है कि चीन की नौसेना की कुल बल शक्ति 2025 तक 395 जहाजों तक बढ़ेगी और 2030 तक 435 जहाजों तक पहुंच जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड कमीशनिंग और तकनीकी उन्नति के साथ भारतीय नौसेना गुणात्मक बढ़त पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here