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लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय

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पटना

लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दिल्ली की कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए हैं। अब इस आदेश के बाद लालू परिवार पर मुकदमा चलेगा।

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दिल्ली राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव सहित कई अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें, जिसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की।

रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोग बरी
अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये और रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया। इससे पहले, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है। अदालत ने मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था।

क्या हैं पूरा मामला?
आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफ़े में दिए या हस्तांतरित किए। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

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