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RSS और RAW पर प्रतिबंध की मांग: US धार्मिक आयोग ने ट्रंप प्रशासन को दी सलाह, लगाए गंभीर आरोप

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वाशिंगटन
संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने ट्रंप प्रशासन से ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ और भारत की खुफिया एजेंसी 'रॉ 'पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। आयोग का आरोप है कि इनकी वजह से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता घटी है। भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में'विशेष चिंता का देश' बताते हुए आयोग ने वाशिंगटन सरकार से कहा है कि वह भारत के साथ हथियार बिक्री और व्यापार नीतियों पर भी ध्यान दे। अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने USCIRF की इस नई रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पिछले वर्षों में आई रिपोर्ट्स को भारत सरकार ने सिरे से खारिज करते हुए पक्षपाती करार दिया था।

USCIRF ने हाल ही में जारी की गई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों को और पूजा स्थलों को निशाना बनाए जाने का भी आरोप लगाया। रिपोर्ट में कहा गया, "भारत के कई राज्यो में धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को लागू करने का प्रयास किया गया है। इन कानूनों में आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा का भी प्रावधान रखा गया है। भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों और धार्मिक शरणार्थियों को जेल में डालने या उन्हें देश से बाहर निकालने को भी सुगम बनाया है। इसके अलावा भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के ऊपर भीड़ द्वारा किए जाने वाले हमलों में भी वृद्धि हुई है।"

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गौरतलब है कि भारत के ऊपर आरोप वह अमेरिका लगा रहा है, जहां पिछले एक साल में हिंसा और नृजातीय भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं। ट्रंप प्रशासन के आने के बाद अमेरिका में भारतीय, अफ्रीकियों और एशिया के लोगों के प्रति भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं। ट्रंप के कई करीबी इस्लाम विरोधी माने जाते हैं।

वक्फ संशोधन अधिनियम की आलोचना
USCIRF ने अपनी रिपोर्ट में भारत सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन अधिनियम की भी आलोचना की है। बता दें, सरकार द्वारा यह अधिनियम इस्लामी धर्मार्थ संपत्तियों के नियमन और प्रबंधन में व्यापक बदलाव करने और इन्हें कानूनी रूप से ढालने के लिए लाया गया था। रिपोर्ट में इसके अलावा उत्तराखंड सरकार द्वारा लाए गए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम की भी आलोचना की गई है। USCIRF ने महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में हुए सांप्रदायिक झड़पों का उल्लेख किया और हिंसा के लिए विश्व हिंदू परिषद विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों (जो RSS से संबद्ध है) को जिम्मेदार ठहराया।

ट्रंप प्रशासन को सिफारिश
USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से सिफारिश की कि वह भारत सरकार पर धार्मिक मुद्दों को लेकर दबाव डाले। उन्होंने सुझाव दिया, "अमेरिकी सरकार को भारत को हथियार बेचने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि भारत सरकार की तरफ से क्योंकि अमेरिका के नागरिकों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ डराने-धमकाने और उत्पीड़न की घटनाएँ जारी हैं।

आपको बता दें, 1998 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित किए गए एक अधिनियम के आधार पर बना यह आयोग दुनिया भर के देशों की धार्मिक स्थिति पर अपने हिसाब से रिपोर्ट तैयार करता है। इस रिपोर्ट के आधार पर यह अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और अमेरिकी कांग्रेस को सिफारिश देता है। यह एजेंसी कहती है कि वह स्वतंत्र रूप से काम करती है, लेकिन इसके नौ आयुक्तों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रतिनिधि सभा तथा सीनेट के वरिष्ठ राजनीतिक नेता करते हैं।

विदेश मंत्रालय ने बताया था पक्षपाती
भारत सरकार लगातार इस आयोग की रिपोर्ट के पक्षपाती और राजनैतिक रूप से प्रेरित करार देती रही है। 2025 में जब इसकी वार्षिक रिपोर्ट आई थी तब विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह रिपोर्ट अलग-थलग घटनाओं को बढा-चढ़ाकर पेश करती है और भारत के विविधता में एकता वाले समाज पर सवाल उठाने का एक सुनियोजित एजेंडा पेश कर रही है। इसे किसी भी देश की धार्मिक स्वतंत्रता की चिंता नहीं है।

आपको बता दें, इससे पहले भी 2019 में लागू किए गए नागरिकता संसोधन एक्ट की भी इस एजेंसी ने आलोचना की थी, जिसके बाद भारत सरकार ने इसकी टीम को वीजा देने से इनकार कर दिया था। यह एजेंसी दुनिया भर के देशों में होने वाली घटनाओं को बढ़ाचढ़ाकर पेश करती है, जबकि अमेरिका में होने वाली घटनाओं को कमतर करके दिखाती है। अगर स्वतंत्र एजेंसियों की रिपोर्ट को देखा जाए, तो अमेरिका में पिछले कुछ सालों में धार्मिक और नृजातीय भेदभाव और हिंसा के मामले बढ़े हैं। इसके अलावा अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं आम हैं।

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