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झरिया, चौथाई कुलहि में जमीन धंसने से एक दर्जन से ज्यादा घरों में आईं दरारें और दहशत

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  झरिया

झारखंड की कोयलानगरी झरिया में एक बार फिर जमीन धंसने की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. चौथाई कुलहि इलाके में धनबाद–सिंदरी मुख्य मार्ग के पास स्थित धर्मनगर और आसपास के क्षेत्रों में अचानक कई घरों में दरारें पड़ गई हैं. जमीन फटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.

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एक दर्जन से अधिक घरों पर संकट
स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक दर्जन से ज्यादा घरों में गंभीर दरारें देखी गई हैं. कई मकानों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि कुछ घरों के पूरी तरह गिरने का खतरा मंडरा रहा है. दरारों का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, जिससे लोगों की नींद उड़ गई है. स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अपने घरों में रहने से डर रहे हैं. कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने घर खाली कर दिए हैं और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है.

जमीन फटने से बढ़ी दहशत
इलाके में जगह-जगह जमीन फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं. लोगों का कहना है कि पहले छोटी दरारें दिखीं, लेकिन अब वे तेजी से चौड़ी होती जा रही हैं. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. स्थानीय निवासी बेहद डरे हुए हैं और प्रशासन से तत्काल राहत और सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कई परिवार बेघर हो सकते हैं.

पुरानी खदान बना खतरे की वजह
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले कोयला खदान संचालित होती थी. करीब 50 वर्षों से लोग यहां रह रहे हैं, लेकिन अब जमीन धंसने की घटनाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि बंद पड़ी खदानों के नीचे खाली स्थान और कमजोर जमीन इसकी मुख्य वजह हो सकती है. झरिया क्षेत्र पहले भी इस तरह की घटनाओं के लिए जाना जाता रहा है, जहां भूमिगत आग और खदानों के कारण जमीन धंसने की समस्या लगातार बनी रहती है.

प्रशासन और बीसीसीएल पर लापरवाही का आरोप
घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है. लोगों का आरोप है कि अब तक जिला प्रशासन और बीसीसीएल के कोई भी अधिकारी मौके पर हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचे हैं. निवासियों का कहना है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासन की उदासीनता समझ से परे है. लोगों ने जल्द से जल्द राहत कार्य शुरू करने, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

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