Home लाइफस्टाइल रोबोट बना बौद्ध भिक्षु, साउथ कोरिया में अनोखा प्रयोग

रोबोट बना बौद्ध भिक्षु, साउथ कोरिया में अनोखा प्रयोग

17
0
Jeevan Ayurveda

रोबोट्स इन दिनों दुनिया में टेक्नोलॉजी हर दिन नई सीमाएं तोड़ रहे हैं. लेकिन साउथ कोरिया में जो हुआ, उसने लोगों को हैरान भी किया और सोचने पर मजबूर भी. यहां पहली बार एक ह्यूमनॉयड रोबोट को बौद्ध भिक्षु (मोंक) बना दिया गया.

सियोल के मशहूर जोग्ये मंदिर में एक खास समारोह के दौरान इस रोबोट को आधिकारिक रूप से बौद्ध दीक्षा दी गई. इस रोबोट का नाम गाबी रखा गया है और इसकी ऊंचाई करीब 130 सेंटीमीटर है.

Ad

असली बौद्ध भिक्षु की तरह मिली ट्रेनिंग
यह कोई टेक शो नहीं था, बल्कि बिल्कुल वैसा ही धार्मिक कार्यक्रम था जैसा इंसानों के लिए होता है. इस रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध पोशाक पहनी, हाथ जोड़कर प्रार्थना की और बौद्ध धर्म के नियमों को स्वीकार किया. समारोह में मौजूद लोगों के सामने इसने वही सारे सवालों के जवाब दिए, जो एक नए भिक्षु से पूछे जाते हैं.

दीक्षा से पहले इस रोबोट ने ट्रेनिंग भी ली. इंसानों की तरह इसे भी नवदीक्षित यानी शुरुआती साधु की तरह तैयार किया गया. इसके बाद इसे आधिकारिक रूप से बौद्ध समुदाय का हिस्सा बनाया गया.

ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, एशिया के कई देशों में बौद्ध मठों में साधुओं की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. ऐसे में रोबोट को एक असिस्टेंट के तौर पर देखा जा रहा है. यह रोबोट मंदिर में आने वाले लोगों को जानकारी दे सकता है. लोगों को तौर तरीके भी सिखा सकता है.

नई पीढ़ी धार्मिक जीवन में कम दिलचस्पी ले रही है और बुजुर्ग भिक्षुओं की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में मंदिरों को चलाना मुश्किल होता जा रहा है.

इससे पहले भी जापान और दक्षिण कोरिया में ऐसे एक्सपेरिमेंट्स हो चुके हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड रोबोट बौद्ध ग्रंथों पर ट्रेन किए जाते हैं ताकि वे लोगों को आध्यात्मिक सलाह दे सकें.

दक्षिण कोरिया में तैयार किए गए इस रोबोट में ऐसी तकनीक डाली गई है जो इंसानों की तरह बात कर सके, सवाल समझ सके और धार्मिक कॉन्टेक्स्ट में जवाब दे सके.

बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर किया गया ट्रेन
यह रोबोट बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर ट्रेन किया गया है. यानी अगर कोई शख्स इससे धर्म या जीवन से जुड़े सवाल पूछता है, तो यह जवाब दे सकता है. यह मंदिर में आने वाले लोगों को प्रार्थना के तरीके समझाता है, बौद्ध परंपराओं के बारे में जानकारी देता है और कुछ मामलों में लोगों को मानसिक शांति या सलाह भी दे सकता है.

इतना ही नहीं, इसे सिर्फ बात करने वाला रोबोट नहीं रखा गया है. इसे मंदिर के कामों में मदद के लिए भी तैयार किया गया है. जैसे मंदिर में सफाई, बेसिक काम, सिक्योरिटी मॉनिटरिंग और विजिटर्स को गाइड करना. यानी यह एक तरह से डिजिटल सहायक है, जो असली भिक्षुओं का काम हल्का कर सकता है.

गौरतलब है कि जापान में भी बुद्धारॉइड जैसे रोबोट बनाए गए हैं, जो धार्मिक सलाह देते हैं और लोगों से बातचीत करते हैं. वहां यह जरूरत इसलिए पैदा हुई क्योंकि कई मंदिर बंद होने की कगार पर हैं.

हालांकि इस रोबोट के डेवलपर्स कहते हैं कि यह रोबोट इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं बनाया गया. इसका मकसद सिर्फ मदद करना है, न कि असली भिक्षु बनना.

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here