नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने वैश्विक मंच पर भारत की धमक एक बार फिर साबित की है। स्वीडन की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' इस समय पूरी रफ्तार से दौड़ रही है। गोटेबर्ग में आयोजित 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' (ERT) की एक उच्च स्तरीय बैठक में पीएम मोदी ने स्वीडिश और यूरोपीय कंपनियों को भारत के मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
इस खास बैठक की सह-मेजबानी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की, जिसमें वोल्वो ग्रुप (Volvo Group) समेत यूरोप और भारत की कई दिग्गज कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय कंपनियों के सामने सहयोग के लिए 5 बड़े सेक्टर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं, जो भारत को वैश्विक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) हब बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख सेक्टर्स में पार्टनरशिप की डिमांड की।
डीप टेक और एआई (AI):- इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग।
ग्रीन और क्लीन एनर्जी:- नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और सस्टेनेबल मोबिलिटी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर:- शहरी परिवर्तन, अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा, डिफेंस, सेमीकंडक्टर और लाइफ साइंसेज (दवाइयां और स्वास्थ्य)।
पीएम मोदी ने कंपनियों को भरोसा दिलाया कि आने वाले सालों में भारत के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने के लिए उनके लिए एक मजबूत और संस्थागत व्यवस्था (Institutional System) तैयार की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी नवाचार (Technology Innovation) की अगली लहर का सह-निर्माण (Co-creation) अब भारत में होना चाहिए।
राउंड टेबल बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 सालों से भारत सरकार रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म (सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन) के मूल मंत्र पर काम कर रही है। मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के दम पर हमारी रिफॉर्म एक्सप्रेस पूरी स्पीड से आगे बढ़ रही है। उन्होंने भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग और बुनियादी ढांचे के विकास को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। मोदी ने कहा कि स्वीडन की ताकत इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी में है, जबकि भारत के पास 'स्केल, टैलेंट और ग्रोथ मोमेंटम' (बड़ा बाजार, हुनर और विकास की रफ्तार) है। इन दोनों को मिलाकर 21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच जनवरी 2026 में संपन्न हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की जमकर तारीफ की। उन्होंने इसे एक बदलाव लाने वाली आर्थिक साझेदारी बताया, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं में नए रास्ते खोलेगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के शब्दों को दोहराते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ है और हम इसे जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का जिक्र करते हुए कहा कि कनेक्टिविटी की यह परियोजना भारत-यूरोप के व्यापारिक रिश्तों को एक नया आयाम देगी।
पीएम मोदी ने भारत के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य अब केवल भारत में सामान बनाना नहीं है, बल्कि "भारत के लिए डिजाइन करना, भारत में निर्माण करना और भारत से पूरी दुनिया को निर्यात करना" है। उन्होंने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया और चुनिंदा सीईओ के साथ भी बातचीत की और स्पष्ट किया कि भारत और स्वीडन का रिश्ता अब महज एक 'खरीदार और विक्रेता' (Buyer-Seller) का नहीं रह गया है, बल्कि यह विचारों, तकनीक और साझेदारी का एक दीर्घकालिक औद्योगिक सफर बन चुका है।










