Home ट्रेंडिंग RIMS के मेडिकल छात्रों में बढ़ता मानसिक तनाव, हर बैच में डिप्रेशन...

RIMS के मेडिकल छात्रों में बढ़ता मानसिक तनाव, हर बैच में डिप्रेशन के मामले चिंताजनक

7
0
Jeevan Ayurveda

रांची.

राज्य के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षित कुजूर की आत्महत्या की घटना ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। रिम्स प्रबंधन ने माना है कि मेडिकल छात्रों के बीच तनाव और अवसाद की समस्या लगातार बढ़ रही है।

Ad

रिम्स के डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डा. शिव प्रिय ने बताया कि एमबीबीएस से लेकर पीजी स्तर तक लगभग हर बैच में कुछ छात्र मानसिक तनाव और डिप्रेशन से गुजर रहे हैं। कई विद्यार्थियों का इलाज रिनपास और सीआइपी जैसे संस्थानों में चल रहा है। ऐसे छात्रों की निगरानी भी की जाती है, लेकिन चुनौती उन मामलों में आती है जहां छात्र अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाते। मालूम हो कि पिछले कुछ वर्षों में रिम्स में मेडिकल छात्रों से जुड़ी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। अक्टूबर 2024 में प्रेम संबंध से जुड़े तनाव में पीजी के छात्र और छात्रा ने हास्टल की छत से कूदकर जान दे दी थी। नवंबर 2023 में भी एक मेडिकल छात्र का जला हुआ शव बरामद हुआ था। पहले भी कई छात्र हास्टल में ही आत्महत्या कर चुके हैं। अभी एक दिन पहले एम छात्र ने हास्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि मेडिकल शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थागत स्तर पर और गंभीर प्रयासों की जरूरत है।

पढ़ाई के साथ हर समय बेहतर करने का दबाव
डॉ. शिव प्रिय के अनुसार मेडिकल शिक्षा का वातावरण अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक होता है। लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल कठिन पढ़ाई ही आत्महत्या या डिप्रेशन का कारण नहीं है। व्यक्तिगत जीवन, भावनात्मक रिश्ते, अकेलापन और पारिवारिक दूरी जैसी बातें भी छात्रों को भीतर से तोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों की उम्र ऐसी होती है जहां भावनात्मक सहारे की जरूरत अधिक होती है। कई बार छात्र अपनी भावनाएं साझा नहीं कर पाते और धीरे-धीरे अवसाद की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

एनएमसी की गाइडलाइन के तहत होती है निगरानी
रिम्स प्रशासन के मुताबिक नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की गाइडलाइन के अनुसार हर मेडिकल छात्र के साथ एक फैकल्टी मेंटर जोड़ा जाता है, ताकि छात्रों की मानसिक और शैक्षणिक स्थिति पर नजर रखी जा सके। एमबीबीएस में नामांकन के समय छात्रों की काउंसलिंग भी कराई जाती है। हालांकि रिम्स प्रबंधन मानता है कि केवल औपचारिक काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से अब संस्थान में नियमित योग और मेडिटेशन क्लास शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि छात्रों के तनाव को कम किया जा सके। साथ ही समय-समय पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन उनमें छात्रों की भागीदारी बहुत कम रहती है। रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा कि बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए अभिभावकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों से नियमित बातचीत करनी चाहिए और उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी छात्र के व्यवहार में असामान्यता दिखे तो परिवार को तुरंत पहल करनी चाहिए। जरूरत पड़े तो छात्र को घर ले जाएं या कालेज प्रशासन को जानकारी दें, ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके।

मौन सबसे बड़ा खतरा : मनोचिकित्सक
रिनपास के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा बताते हैं कि मेडिकल छात्रों में अवसाद की सबसे बड़ी वजह अपनी समस्या को भीतर दबाए रखना है। प्रतिस्पर्धा, भविष्य का दबाव और लगातार प्रदर्शन की चिंता छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बना रही है। ऐसे में संस्थानों में नियमित मनोवैज्ञानिक सहायता, खुला संवाद और संवेदनशील माहौल तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है।

अक्षित कुजूर का हुआ पोस्टमार्टम
एमबीबीएस के छात्र अक्षित कुजूर के शव का रविवार को पोस्टमार्टम किया गया। इस बीच छात्र के पिता कोडरमा से रिम्स पहुंचे और उनकी सहमति के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की गई। इस बीच उनके पिता की आंखें नम थी और एक ही बात बाेल रहे थे कि उनका सबकुछ चला गया। इस बीच अक्षित कुजूर के मित्रों ने पिता को संभाला। प्रबंधन ने बताया कि अभी पुलिस को सिर्फ सूचना दी गई है, उनके पिता से अनुमति अगर मिलती है तो इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। फिलहाल पुलिस छानबीन में जुटी है और जिस प्रेमिका की बात सामने आ रही है उसकी जांच की जा रही है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here