पटना
बिहार के निबंधित कल-कारखानों में अब इंस्पेक्टर राज नहीं चलेगा। राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने फैक्ट्रियों से इंस्पेक्टर राज को जड़ से खत्म करने का प्लान तैयार कर लिया है। इसके तहत अब औचक निरीक्षण पर रोक होगी और सरकार की मंशा है कि इससे संबंधित कार्यों को ऑनलाइन पोर्टल पर लाया जाए। इसके जरिए तरफ जहां काम में पारदर्शिता आएगी तो वहीं भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगा। नई योजना के तहत श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के अधिकारी औचक रूप से किसी भी कारखाने का निरीक्षण नहीं कर सकेंगे।
अब विभाग की ओर से नामित अधिकारी ही कारखानों का निरीक्षण कर सकेंगे। निरीक्षण के पहले कारखाना संचालकों को संबंधित अधिकारी और निरीक्षण की तिथि की जानकारी दी जाएगी। जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन रहेगी। इससे कोई खामी बता कारखाना संचालकों से इंस्पेक्टर किसी तरह की अवैध उगाही नहीं कर सकेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार राज्य में सामाजिक सुरक्षा (बिहार) नियमावली 2026 लागू की गई है। इसके तहत न केवल कामगारों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि कारखाना संचालकों को भी इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिलेगी।
सरकार लाएगी ऑनलाइन पोर्टल
इसके लिए वेब आधारित निरीक्षण प्रणाली लाई जाएगी। इसमें निरीक्षण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित हो सकेगी। यह सरकार का ऑनलाइन पोर्टल होगा। कम्प्यूटर से ही एलॉटमेंट होगा कि कौन सा इंस्पेक्टर किस फैक्ट्री में जाएगा। इससे मालिक और इंस्पेक्टर की सेटिंग नहीं होगी। निरीक्षण से 15 दिन पहले कंपनी को ऑनलाइन बता दिया जाएगा कि उसके यहां निरीक्षण होने वाला है।
वेतन, सुरक्षा और पीएफ सभी चीजों की ऑनलाइन होगी जांच
कारखाना से जुड़ी सभी गतिविधियां ऑनलाइन ही जांच की जा सकेगी। मसलन कर्मियों को वेतन मिला या नहीं, सुरक्षा की क्या स्थिति है और पीएफ कट रहा है या नहीं। निरीक्षण के तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी ताकि मुख्यालय के अधिकारी उसे देख सकें। अगर कोई कमी निकली तो ऑनलाइन ही उसमें सुधारने का टास्क दिया जाएगा।
कंपनी ने अपनी गलती सुधारी या नहीं, यह सब ऑनलाइन रहेगा। सुधार होने पर उसकी रिपोर्ट अपलोड करने पर इंस्पेक्टर कारखानों की जांच नहीं कर सकेगा। कोई परेशानी होने पर कामगार ऑनलाइन ही शिकायत करेंगे। इस ऑनलाइन व्यवस्था में सरकार को इसकी जानकारी रहेगी कि कौन कारखाना संचालक किस कानून का पालन नहीं कर रहा है।
आंकड़ों पर एक नजर
● 7952 राज्य में निबंधित कारखानों की संख्या है
● 2000 कारखानों में 20 से अधिक कर्मी कार्यरत
● 120 कारखानों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया है









