Home ट्रेंडिंग बिहार के बाढ़ में 65 बैंक खाते शक के घेरे में, मनी...

बिहार के बाढ़ में 65 बैंक खाते शक के घेरे में, मनी म्यूल से साइबर फ्रॉड का संदेह

23
0
Jeevan Ayurveda

पटना
 बाढ़ में सामने आए साइबर फ्रॉड के इस मामले में ‘मनी म्यूल अकाउंट’ के इस्तेमाल की आशंका ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2024 में एक महिला ने अनाज देने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए और बाद में उन खातों से जुड़ा सिम, पासबुक और एटीएम अपने पास रख लिया।

साइबर अपराध की भाषा में ‘मनी म्यूल’ ऐसे बैंक खाते या खाताधारक को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति की संदिग्ध या अवैध रकम प्राप्त करने, निकालने अथवा आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

Ad

कई मामलों में खाताधारक को यह जानकारी नहीं होती कि उसका खाता साइबर अपराध की रकम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन बैंक रिकॉर्ड में खाता उसके नाम पर होने के कारण जांच की शुरुआती कड़ी उसी तक पहुंचती है।

25 किलो अनाज मिलने का लालच
कोंदी पंचायत के सरपंच रूपेश कुमार के अनुसार, वर्ष 2024 में सीता देवी नाम की एक महिला ग्रामीणों के संपर्क में आई थी। आरोप है कि उसने हर महीने 25 किलो अनाज मिलने का लालच देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाए। बताया गया कि करीब 65 लोगों के आधार कार्ड के माध्यम से नए सिम लिए गए और उन्हीं नंबरों से सेंट्रल बैंक तथा केनरा बैंक में सीएसपी के जरिए खाते खुलवाए गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि खाते खुलने के बाद नए सिम, पासबुक और एटीएम भी महिला ने अपने पास रख लिए। शुरुआत में कुछ लोगों को अनाज दिया गया, जिससे ग्रामीणों का विश्वास कायम हुआ। बाद में अनाज मिलना बंद हो गया और खाताधारकों को अपने खातों में होने वाले लेन-देन की जानकारी भी नहीं रही।

मध्य प्रदेश और हैदराबाद से संदिग्ध पैसे आए
मामले में हड़कंप तब मचा, जब कुछ खातों में मध्य प्रदेश और हैदराबाद से संदिग्ध रकम आने की जानकारी सामने आई और पुलिस संबंधित खाताधारकों के घर पहुंची। खाताधारकों का कहना है कि उन्हें इन पैसों के स्रोत की जानकारी नहीं थी। इसके बाद बड़ी संख्या में महिला और पुरुष खाताधारक बैंक पहुंच गए और अपने खाते बंद कराने की मांग करने लगे।

इस पूरे मामले में मनी म्यूल का एंगल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर अपराध में सीधे अपराधी के खाते के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते का इस्तेमाल रकम प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। इसके बाद रकम को नकद निकालने या दूसरे खातों में भेजने की प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि खाताधारक को इस गतिविधि की जानकारी नहीं है, तब भी जांच में उसके बैंक खाते का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण कड़ी बन जाता है।

पुलिस कर रही पूरे मामले की जांच
बैंक प्रबंधन का कहना है कि कोई भी ग्राहक निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैंक में खाता खुलवा सकता है, लेकिन खाता खुलने के बाद उसे किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए सौंपना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। बैंक का कहना है कि ऐसे मामलों में साइबर फ्रॉड की रकम खाते में आने पर पुलिस सबसे पहले खाताधारक से ही पूछताछ कर सकती है।

इस मामले में फिलहाल पुलिस के पास आवेदन दिए जाने की जानकारी नहीं है। फिलहाल, जांच का सबसे अहम बिंदु यही होगा कि 65 खातों में रकम भेजने वाले कौन थे, रकम किसने निकाली और इन खातों के पीछे वास्तविक ऑपरेटर कौन था। यदि इन कड़ियों के बीच आपराधिक नेटवर्क स्थापित होता है, तो मनी म्यूल के जरिए बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क तक पहुंचने की संभावना की भी जांच की जा सकती है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here