Home देश रुपये को संभालने के लिए RBI का बड़ा कदम, तेल कंपनियों को...

रुपये को संभालने के लिए RBI का बड़ा कदम, तेल कंपनियों को डॉलर बेचेगा रिजर्व बैंक

17
0
Jeevan Ayurveda

 नई दिल्‍ली

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को सपोर्ट करने के लिए कई उपयों का ऐलान किया है. आरबीआई ने तीन सरकारी तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों (OMCs) की डेली अमेरिकी डॉलर की पूरी आवश्‍यकता को पूरा करने के लिए एक स्‍पेशल विंडो खोल रहा है. इसके अलावा, सट्टेबाजी को रोकने, रिजर्व रिस्‍क और करेंसी हेजिंग संबंधी भी उपाय किए गए हैं। 

Ad

RBI के एक बयान के अनुसार, डॉलर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) को बेचे जाएंगे. यह सोमवार, 12 अक्‍टूबर, 2026 से प्रभावी होगी और अगले आदेश तक लागू रहेगी। 

इस व्‍यवस्‍था के तहत RBI नामित बैंकों के माध्‍यम से तीन पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों को अमेरिकी डॉलर बेचेगा. इस सुविधा का उद्देश्‍य यह तय करना है कि कंप‍नियां अपने ऑपरेशन के लिए अपनी हर दिन की विदेशी मुद्रा आवश्‍यकताओं को पूरा कर सकें। 

ये उपाय ऐसे समय में आए हैं जब केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना हुआ है. शुक्रवार को रुपया 96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो मई में दर्ज किए गए अपने सर्वकालिक निचले स्तर 96.96 रुपये के करीब है। 

1. तेल कंपनियों के लिए स्‍पेशल डॉलर विंडो 
केंद्रीय बैंक ने मौजूदा बाजार स्थितियों के आकलन के बाद इस उपाय की घोषणा की. हालांकि, उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सुविधा कितने समय तक लागू रहेगी, केवल इतना कहा कि यह अगली सूचना तक जारी रहेगी. इस विशेष व्यवस्था के तहत तीनों तेल कंपनियों को बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से डॉलर प्राप्त करने के लिए एक चैनल उपलब्ध कराया गया है. आरबीआई ने इस व्यवस्था के तहत आपूर्ति की जाने वाली विदेशी मुद्रा की मात्रा का खुलासा नहीं किया है और न ही व्यक्तिगत लेनदेन पर किसी सीमा का विवरण दिया है। 

तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों को कच्‍चे तेल के आयात और अन्‍य विदेशी खर्चों के भुगतान के लिए अमेर‍िकी डॉलर की आवश्‍यकता होती है. कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्य रूप से डॉलर में होता है, इसलिए रुपये-डॉलर विनिमय दर में उतार-चढ़ाव आयात की लागत और कंपनियों की वित्तीय आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकता है।  

2. विदेशी करेंसी डेरिवेटिव के लिए लोअर लिमिट  
केंद्रीय बैंक ने कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन करने की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया है. संशोधित सीमा रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर भी लागू होती है. इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़े डेरिवेटिव पोजीशन, जैसे आयात भुगतान या निर्यात सपोर्टिव हों, न कि मुख्य रूप से सट्टेबाजी के उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाएं। 

3. नया 20% विदेशी करेंसी रिजर्व रिस्‍क
आरबीआई ने 20 लाख डॉलर से अधिक के सांकेति
क मूल्य वाले पात्र रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए विदेशी मुद्रा रिस्‍क रिजर्व (एफईआरआर) की आवश्यकता शुरू की है. रजिस्‍टर्ड डीलरों को हर पात्र लेनदेन के रुपये मूल्य के 20% के बराबर कैश रिजर्व अमाउंट आरबीआई के पास रखनी होगी. यह आवश्यकता उन कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर लागू होती है, जिनका उपयोग चालू खाता जोखिमों को हेज करने के लिए किया जाता है, जहां यूजर्स रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्रा खरीदता है। 

4. हेजिंग के लिए सख्त डॉक्‍यूमेंटेशन
रजिस्‍टर्ड डीलरों को फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट में एंट्री करने वाले यूजर्स से एक वचन पत्र प्राप्त करना और उसे अपने पास रखना होगा, जिसमें यह पुष्टि की गई हो कि उसी रिस्‍क को किसी अन्य डीलर के माध्यम से हेज नहीं किया गया है. इस आवश्यकता का उद्देश्य एक ही तरह के जोखिम की दोहरी हेजिंग को रोकना और बाजार में सुधार करना है।  

क्‍या इससे रुपये की गिरावट रुकेगी? 
इन उपायों से डॉलर की सट्टा मांग कम हो सकती है और शॉर्ट टर्म अस्थिरता में राहत मिल सकती है. हालांकि, यह कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक डॉलर की गतिविधियों सहित व्यापक कारकों पर निर्भर करेगी. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 12.95 अरब डॉलर घटकर 734.60 अरब डॉलर रह गया, जो लगातार चौथी साप्ताहिक गिरावट है। 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here