Home मध्य प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव: यूनेस्को धरोहर खोन और कुटियाट्टम में जीवंत हुई रामकथा

अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव: यूनेस्को धरोहर खोन और कुटियाट्टम में जीवंत हुई रामकथा

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काव्य-मानस में शुक्रवार को आमजन को मिलेगा मंच, श्रीरामचंद्र-केंद्रित भजन, गान, कविता एवं रचनाएँ प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर

भोपाल
संस्कृति विभाग और श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा रवींद्र भवन परिसर में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ के चौथे दिन दर्शकों को भारत और थाईलैंड की समृद्ध नाट्य परंपराओं के माध्यम से श्रीरामकथा के विविध प्रसंग देखने को मिले। इस अवसर पर यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल थाईलैंड के 'श्री रामाकेन दल' ने पारंपरिक मुखौटों और मुद्राओं के साथ रामाकिएन पर आधारित मारीच-प्रसंग, सीता-हरण तथा राम-रावण युद्ध का जीवंत मंचन किया। केरल की दो हज़ार वर्ष पुरानी शास्त्रीय परंपरा 'कुटियाट्टम' शैली में शक्तिभद्र-रचित संस्कृत नाटक ‘आश्चर्यचूड़ामणि’ के चतुर्थ अंक ‘जटायुवधम्’ की सशक्त प्रस्तुति दी गई।

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कुटियाट्टम केंद्र (केरलम) और 'नेपथ्य' संस्था के कलाकारों ने रावण-जटायु संवाद, युद्ध और जटायु के सर्वोच्च बलिदान के मार्मिक दृश्य को पारंपरिक मुद्राओं और भावपूर्ण अभिनय से साकार किया। मंच पर रावण की भूमिका मार्गी मधु चाक्यार, जटायु की भूमिका नेपथ्य राहुल चाक्यार और सीता की भूमिका नेपथ्य आरती ने निभाई, जबकि मिझावु और इडक्का वाद्यों की संगत ने दृश्य को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। संचालक (संस्कृति) एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य विविध कला-विधाओं के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को आमजन, विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाना है।

उत्सव के अंतर्गत तीन दिवसीय 'कौशलेय की वन-गमन गाथा' कथा-वाचन (स्टोरीटेलिंग) सत्र का भी शुभारंभ हुआ। प्रथम सत्र में अलवर के श्री अंकित अवस्थी ने 'श्रीरामचंद्र वन-गमन पथ' पर अपने विचार रखते हुए युवा पीढ़ी (Gen-Z) को रामायणकालीन संस्कृति से जोड़ने और चित्रकूट के त्याग, मर्यादा व पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत मुंबई की सुश्री अमि गणात्रा ने 'वाल्मीकि के हनुमान – बुद्धिमताम् वरिष्ठम्' विषय पर व्याख्यान देते हुए स्पष्ट किया कि वाल्मीकि रामायण में श्रीहनुमान को केवल बाहुबली ही नहीं, बल्कि अपार बौद्धिक क्षमता, संवाद-कुशलता और वेद-व्याकरण के ज्ञाता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

उत्सव के पाँचवें दिन शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से रवींद्र भवन के अंजनी सभागार में ‘काव्य-मानस’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें श्रीराम पर केंद्रित भजन, कविता, गान और दोहे प्रस्तुत करने के लिए आमजन निःशुल्क सहभागिता कर सकते हैं। इससे पहले प्रातः 11 बजे 'राम-लेखन कला' (टाइपोग्राफी) कार्यशाला होगी। सायं 5 बजे कथा-वाचन सत्र में श्री संदीप द्विवेदी एवं आचार्य देवव्रत यथिनाथ जी महाराज का व्याख्यान होगा। इसके बाद सायं 7 बजे से कर्नाटक की 'यक्षगान' और ओडिशा की 'ओडिसी' नृत्य-शैली में रामकथा का भव्य मंचन किया जाएगा।

 

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