Home मध्य प्रदेश कभी नक्सलियों की गोलियों से गूंजते थे ये गांव, अब घर-घर पहुंचकर...

कभी नक्सलियों की गोलियों से गूंजते थे ये गांव, अब घर-घर पहुंचकर लोगों की जरूरतें जान रहे अधिकारी

23
0
Jeevan Ayurveda

बालाघाट
 कभी बंदूक और हिंसा की दहशत झेलने वाले बालाघाट के 100 गांवों में अब विकास की नई सुबह लाने की तैयारी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने इन दूरदराज के नक्सल प्रभावित इलाकों के कायाकल्प के लिए एक विशेष मेगा अभियान शुरू किया है, जिसके तहत प्रशासनिक अमला सीधे गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं का समाधान कर रहा है।

गांवों में 14 दिनों तक आवश्यकताओं का आकलन करेंगे
प्रदेश सरकार ने बालाघाट जिले के 100 नक्सल प्रभावित गांवों के विकास के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। यह अभियान 29 अक्टूबर को शुरू हुआ और इसका उद्देश सरकारी योजनाओं का फायदा ग्रामीणों तक पहुंचाना है। इस योजना के तहत, विभिन्न विभागों के कर्मचारी इन गांवों में 14 दिनों तक जाकर यहां की आवश्यकताओं का आकलन करेंगे और विकास के लिए प्रस्ताव तैयार करेंगे।

Ad

सरकार ने 100 गांवों को चार समूहों में बांटा है। अधिकारियों ने बताया कि 'ग्रामीणों की मूल जरूरतों, स्थानीय समस्याओं और विकास की संभावनाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।' इस जानकारी के आधार पर, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाए और रोजगार से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर, 26 अक्टूबर को एक टीम ने गांवों का दौरा किया। इस टीम में लंजी के उप-जिला मजिस्ट्रेट आदित्य नारायण तिवारी शामिल थे, जिन्होंने कल सेवर, कट्टीपर, सतना व बारगुड़ गांवों का दौरा किया। वहीं, बाइहर के एसडीएम अनिकेत शांडिल्य ने दादेक्सा, बिलालकासा और अन्य गांवों का दौरा किया। इसी क्रम में, ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा के कार्यकारी इंजीनियर मनोज धुर्वे ने किरनपुर क्षेत्र में ग्रामीणों से बातचीत की।

मूलभूत सुविधाओं की डिमांड सबसे ज्यादा
28 अक्टूबर को, कलेक्टर आदित्य सिंह ने गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों से बातचीत की। इस दौरान गांवों में सड़कों, पुलों, पीने के पानी, सिंचाई, स्कूल भवन, आंगनवाड़ी भवन और बिजली की सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया गया। 'सरकारी सुविधाओं के स्तर के आधार पर आवश्यक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे,' एक अधिकारी ने बताया।

सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका से संबंधित अवसर उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि गांवों में रोजगार के अवसरों को विकसित करने के लिए एक योजना तैयार की जाए। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

बालाघाट के कलेक्टर आदित्य सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे निर्धारित 14 दिनों के भीतर चुने गए गांवों का दौरा पूरा करें और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। 'इन 100 नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, युवाओं और आदिवासी समुदायों को शिक्षा, रोजगार और आत्म-रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं,' ऐसा अधिकारी ने कहा।

इस तरह से, मध्य प्रदेश की सरकार इन गांवों को विकास की मुख्य धारा में लाने की कोशिश कर रही है। यह अभियान यह सुनिश्चित करेगा कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और उनकी जिंदगी में सुधार हो।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here